Aaj Savere · 2025-06-22 22 Jun 2025 08:40 कह न ठंडी साँस में अब भूल वो जलती कहानी, आग हो उर में तभी दृग में सजेगा आज पानी, हार भी तेरी बनेगी मानिनी जय की पताका, राख क्षणिक पतंग की है अमर दीपक की निशानी, है तुझे अंगार-शय्या पर मृदुल कलियाँ बिछाना, जाग तुझको दूर जाना, जाग तुझको दूर जाना… नमस्कार….सूर्य की ओजस्वी लालिमा धारण किए हुए इस सुबह… Original: All India Radio