Aaj Savere · 2025-11-11 11 Nov 2025 09:12 “ हो के मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिए ज़िंदगी भोर है , सूरज से निकलते रहिए एक ही ठाँव पे ठहरेंगे तो थक जाएँगे धीरे धीरे ही सही राह पे चलते रहिए। Original: All India Radio